बांदा : भीषण गर्मी ने बांदा जिले को भट्ठी में तब्दील कर दिया है। लगातार चौथे दिन बांदा देश का सबसे गर्म स्थान रहा। बुधवार को यहां अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 48.2 डिग्री तक पहुंच गया था। आसपास के चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, औरैया, फतेहपुर और कानपुर देहात जैसे जिलों में भी रेड अलर्ट जारी है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बांदा की पठारी मिट्टी और टेबिललैंड जैसी सपाट चट्टानें इस गर्मी की मुख्य वजह हैं। सूरज की सीधी किरणें इन कठोर चट्टानों और पत्थरों को तेजी से गर्म कर देती हैं। ये चट्टानें गर्मी सोखकर फिर वातावरण में लौटाती हैं। मानसून से पहले मध्य भारत पर बनने वाला एंटी-साइक्लोन बांदा को अपनी सरहद पर रखता है। इससे हवाएं नीचे की ओर आती हैं और पठारी क्षेत्र की गर्मी के साथ मिलकर माहौल को उबाल देती हैं। पाकिस्तान के जैकोबाबाद से शुरू होकर प्रयागराज-बांदा होते हुए गुजरने वाली गर्म बेल्ट भी तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है।
खनन ने बढ़ाई पर्यावरणीय बर्बादी
स्थानीय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ वर्षों से हो रहे अनियंत्रित खनन ने प्राकृतिक व्यवस्था को बुरी तरह नष्ट कर दिया है। बांदा के पठारी इलाकों में पत्थर और बालू खनन से वनस्पति आवरण कम हुआ है, जिससे भूमि तेजी से गर्म हो रही है। पेड़ों की कटाई और खदानों ने मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता को भी घटा दिया है। परिणामस्वरूप, दिन में तापमान आसमान छू रहा है और रात का न्यूनतम तापमान भी 28 डिग्री के आसपास बना हुआ है।
शहर थम सा गया, जीवन अस्त-व्यस्त
सुबह 10 बजे के बाद शहर की सड़कें सुनसान हो जाती हैं। दुकानें खुली रहती हैं लेकिन ग्राहक नदारद रहते हैं। अप्रैल से अब तक व्यापारियों की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है। किसान रात के समय खेतों में काम करने को मजबूर हैं। मजदूर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम बंद रख रहे हैं। खाने-पीने की दुकानें भी शाम ढलने के बाद ही खुल पा रही हैं।
बिजली विभाग पर भारी दबाव है। 44 उपकेंद्रों पर कर्मचारी 1,379 ट्रांसफार्मरों पर लगातार पानी डाल रहे हैं। पिछले 45 दिनों में कई ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। बिजली आपूर्ति मात्र 16 घंटे तक सीमित होकर रह गई है।
जिला प्रशासन ने रेड अलर्ट के साथ एडवाइजरी जारी कर लोगों से दोपहर में घर से बाहर न निकलने, खूब पानी पीने और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है। भीषण लू को देखते हुए स्कूलों में छुट्टियां बढ़ाई जा सकती हैं।
बांदा और आसपास के पठारी क्षेत्रों में गर्मी का यह प्रकोप मानसून आने तक जारी रहने की संभावना है। पर्यावरण संरक्षण और खनन पर सख्त नियंत्रण की मांग अब जोर पकड़ रही है।

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