हमीरपुर : बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल के सेगमेंटल स्पैन के गिरने से 6 मजदूरों की मौत हो गई। इस हादसे ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उदास कर दिया। स्वासा गांव निवासी राजेंद्र सिंह इस घटना के सबसे दर्दनाक शिकार बने, जिन्होंने अपने आँखों के सामने अपने इकलौते बेटे को खो दिया।
राजेंद्र सिंह पुल निर्माण स्थल पर गनमैन की ड्यूटी करते हैं। उनके पास लाइसेंसी बंदूक होने के कारण ठेकेदार ने उन्हें सुरक्षा जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने अपने बेटे पुष्पेंद्र को भी गार्ड के रूप में काम पर लगा लिया था। पिता-पुत्र रोज साथ ड्यूटी पर जाते और सुबह साथ लौटते थे।
बृहस्पतिवार रात भी दोनों ड्यूटी पर थे। देर रात अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। राजेंद्र सिंह ने बंदूक भीगने से बचाने के लिए उसे पुष्पेंद्र को थमा दिया। पुष्पेंद्र बंदूक लेकर पास खड़ी हाइड्रा मशीन में बैठ गया।
पिता फिसले, बेटा बच नहीं सका
राजेंद्र आंधी से बचने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वे बेतवा नदी में जा गिरे। किसी तरह वे बाहर निकले, लेकिन तभी जोरदार धमाका हुआ। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो पुल का एक बड़ा सेगमेंटल स्पैन भरभराकर नीचे गिर चुका था। राजेंद्र सिंह अपनी आँखों के सामने बेटे को बचाने में असमर्थ रहे। पुष्पेंद्र उसी हादसे में अपनी जान गंवा बैठा।
परिवार पर छाया दुख का साया
राजेंद्र सिंह के परिवार में अब गहरा दर्द है। इस हादसे में न सिर्फ पुष्पेंद्र की जान गई, बल्कि कई अन्य मजदूरों की भी मौत हो गई। एक परिवार की दास्तां यह भी है कि चार बेटियों का इकलौता सहारा (पिता) इस हादसे में चला गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। पुल निर्माण एजेंसी और ठेकेदार पर लापरवाही बरतने का आरोप लग रहा है। मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है, लेकिन दर्द की इस घड़ी में ये सहायता परिवारों के लिए सिर्फ कागजी सहारा बनकर रह गई है।

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