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तुर्की में आए भूकंप से हिली दुनिया, भारत में भी खतरा

तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप और उसके बाद के झटकों ने पूरी दुनिया को दहलाकर रख दिया है। भूकंप के कारण धराशाई हुई इमारतें लाशें उगल रही हैं और अब तक 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हजारों इमारतों के मलबे में बचे लोगों को ढूंढ़ने के लिए बचावकर्मी काम में लगे हुए हैं। 

तुर्की की तस्वीरें देखकर आपके मन में भी कहीं न कहीं ख्याल आया होगा कि क्या भारत में भी भविष्य में ऐसा विनाशकारी भूकंप आ सकता है? आइए, समझते हैं:

धरती पर कैसे आता है भूकंप?

भूकंप या भूचाल पृथ्वी की सतह के हिलने को कहते हैं। पृथ्वी के स्थलमण्डल में ऊर्जा के अचानक मुक्त हो जाने के कारण पैदा होने वाली भूकम्पीय तरंगों की वजह से धरती का कोई हिस्सा हिलने लगता है। हर साल हजारों छोटे-बड़े भूकंप आते ही रहते हैं लेकिन कई बार ये बहुत विनाशकारी साबित होते हैं। चीन के शांग्सी में 1556 में आए भूकंप को इतिहास का सबसे विनाशकारी भूकंप माना जाता है। इस भूकंप के चलते कुल मिलाकर 8 लाख लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से 1 लाख लोग तो तुरंत चल बसे थे।

भारत में हैं भूकंप के 4 जोन
भारत की बात करें तो यहां भी हर साल सैकड़ों भूकंप आते हैं। हालांकि अधिकांश भूकंपों के बारे में लोगों को पता भी नहीं चलता क्योंकि इनकी तीव्रता काफी कम होती है। भारतीय मानक ब्यूरो यानी कि BIS ने भारत को 4 अलग-अलग ‘सेस्मिक’ या यूं कहें कि भूकंप के जोन में बांटा है। दूसरे और तीसरे जोन में तो खतरे की कोई विशेष बात नहीं है, लेकिन चौथे और पांचवे जोन में कभी भी तेज भूकंप दस्तक दे सकता है। देश का लगभग 11 प्रतिशत क्षेत्र जोन 5 में, 18 प्रतिशत जोन 4 में, जोन 3 में 30 प्रतिशत और जोन 2 में बाकी का हिस्सा आता है।

दूसरे सेस्मिक जोन में आते हैं ये इलाके
भारत में भूकंप का जोन नंबर एक नहीं है क्योंकि इस जोन में किसी भी क्षेत्र को अंकित नहीं किया गया है। दूसरे जोन की बात करें तो राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश का कुछ हिस्सा आता है। शहरों की बात करें तो त्रिची, बुलंदशहर, मुरादाबाद, गोरखपुर और चंडीगढ़ इस जोन में आते हैं। इन इलाकों में कभी भूकंप आया तो तबाही के आसार न के बराबर होंगे क्योंकि उनकी तीव्रता ज्यादा नहीं होगी।

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